सांसे चल रही हैं
जिंदगी चल रही है
बसें चल रही हैं
ट्रकें चल रही हैं
रेलें चल रही हैं
हवाएं चल रही हैं
तिरंगे चल रही हैं
नावें चल रही हैं
कुछ भी तो रुका नहीं है
तो तुम क्यों रुक गए,राही!
चल तू जैसे चले, सिपाही।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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