कुछ सीखने की चाह है
तो खुलता नया राह है
जिंदगी भर कुछ नया सीखते जाना है
और आगे और आगे बढ़ते जाना है
जो सीखता नहीं नया,वही बुढ़ा होता है
जिसके पास सपना नहीं होता है
वही बुढ़ा होते जाता है
जो पढ़ेगा नहीं
वह बढ़ेगा नहीं।
- सहज कुमार
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