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कैसा होगा ताजमहल?

                
                                                         
                            आ गया,
                                                                 
                            
कितने दिन बाद यहाँ पहुंच गया,
किताबों में पड़ा था,
यह अजूबा,
सोचा करता था
न जाने कैसा होगा ताजमहल।

अब देखने के लिए लालायित हूँ
और उछलते हुए
आगे जाते जा रहा हूँ
और कह रहा हूँ
बस आ ही गया है ताजमहल।

जब भी कोई यहाँ पहुँचता था,
मैं उसके फोटो देखता था,
तो कहता था,
मैंने इतना पढ़ा पर
फिर भी
क्यों मुझे नहीं मिला ताजमहल।

आऊँगा आऊँगा जरूर आऊँगा
यही सोचता था,
इस अजूबे में क्या खासियत है
देखने जरूर जाऊँगा
यही कहता था
अब नजदीक है
मुझे खींचने वाला सफेद ताजमहल।

लोग कहते हैं बहुत सुंदर है,
कुछ इसे प्यार की निशानी मानते है,
मैं यह उसे देखकर पता लगा ही लूँगा,
फिर यदि सच में अच्छा होगा तो
कहूँगा है स्वर्ग सा ताजमहल।

बस दो कदम और,
थोड़ा और चलते जा,
इतना अधीर मत हो
अब तो आ ही गया है,
मुमताज के लिए
बनवाया गया
शाँजाँ का ताजमहल।

-अंकित किरार
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2 वर्ष पहले

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