मैं हूँ ना....
जब मन घबराए,
जब नींद ना आए,
तो डरना मत बस याद कर लेना,
मैं हूँ ना.
जब लोग सताए,
जब किसी की बात रुलाए,
तो मुझे बता देना,
मैं हूँ ना.
जब दर्द माथे का बढ़ने लगे,
जब परेशान हवाएँ करने लगे,
तो रोना मत बस ये सोच लेना कि,
मैं हूँ ना.
जब रातों में अँधेरा छा जाए,
जब बादल गरजे और डराए,
तो कभी डरना मत ये सोच कर,
कि मैं हूँ ना.
जब अपने ही पराए हो जाएं,
जब मन में खत्म सारी दुआएं हो जाएं,
तब बस आंखें बंद करके मांग लेना,
मैं हूं ना।
जब आंखों से आंसू बहते रहें,
जब कोई बुरा भला अगर तुम्हें कहते रहें,
तो तुम अपने हाथ उठा लेना ये सोच कर,
कि मैं हूं ना।
जब अगर तकलीफे कभी बढ़ जाएं,
अगर दाग दामन में कभी पड़ जाएं,
तो बिना कुछ सोचे समझे मेरे पास चले आना,
अभी तो मैं हूं ना.....
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