आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अगर अगले जनम तू मेरी बेटी बनी...

                
                                                         
                            अगर अगले जनम तू मेरी बेटी बनी...
                                                                 
                            

दुनिया की कोई रीत वैसी नहीं थी,
जैसे मेरे मन में बसी वो गीत थी,
तेरे लिए मेरी प्रीत महज एक प्रीत नहीं थी,
तू मेरे मन में बसी थी ऐसे जैसे किसी अदाकार की तू संगीत थी.

हा हर मायने में तेरा कोई तोड़ नहीं था,
माँ तेरे सिवा दुनिया में कोई बेजोड़ नहीं था,
थक्क गई आँखे भी अब तेरी यादों में,
शायद मेरे जीवन के सफर का इससे दर्द भरा कोई मोड़ नहीं था.

अब भगवान से यही दुआ मांगता हूँ,
कि अगले जन्म में तेरे सारे सपने सजाए,
तेरा बेटा बनकर देख लिया मैंने माँ,
बस अब भगवान अगले जन्म में तुझे मेरी बेटी बनाए।

फिर अगले जन्म में तेरे सारे सपने पूरे करूँगा,
तेरे देखे हर ख्वाबों को सजाऊँगा,
इस जन्म में उंगली पकड़ कर चलना तूने मुझे सिखाया है,
अगले जन्म में तेरा हाथ पकड़ कर सारी दुनिया में तुझे घुमाऊँगा।

माँ बनकर अपने अरमानों को दबा दिया तूने,
पर एक बेटी बनकर अपने अरमान पूरे कर लेना,
खुद अनपढ़ बनकर हमें पढ़ाया तूने,
अगले जनम में बेटी बनकर तू भी पढ़ लेना।

भगवान से ज़्यादा कुछ तो मांगा नहीं मैंने,
बस अगले जनम में तू मेरी बेटी बने यही दुआ मेरी काफ़ी है,
माँ बनकर अपना फ़र्ज़ तो निभाया तूने माँ,
पर अभी तेरा बेटा होने का फ़र्ज़ मेरा बाकी है।

मेरी बेटी बनना तो मांग लेना मां मुझसे,
दुनिया की ये सारी खुशी,
ज़मीन कम पड़ेगी तो चांद से मांग लाऊंगा,
पर होने न दूंगा मां मैं कभी तुझे दुखी.

मां, बेटी तू इसीलिए बनना क्योंकि,
क्योंकि मां, बेटी अपने बाप की आंखों का तारा होती है,
एक बाप की दुनिया बस अंधेरों से भरी होती है,
पर मां, बेटी ही तो उस अंधेरों में टिम टिमता सितारा होती है.

माँ तूने माँ बनकर ना जाने कितने गमों को अमृत समझ का पीना सीखा,
माँ तूने माँ बनकर ना जाने कितने दर्द भरे लम्हों को जीना सीखा,
माँ बस अगले जन्म में मेरी बेटी बनकर मुझे भी दर्द भरे लम्हों को जीने देना,
माँ बस मेरे लिए अगले जन्म में मेरी बेटी बनना और मुझे भी तेरे चरण धोके उस चरणामृत को पीने देना।

माँ तू मेरी बेटी ज़रूर बनना,
अभी तेरे साथ बातें बहुत सी अधूरी हैं,
शायद बेटा बनकर नहीं कर पाया,
पर अब एक पिता बनकर बात करना बहुत ज़रूरी है।

माँ बस अब अगले जन्म मेरी बेटी ही बनना। ....
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
42 minutes ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर