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बलिदान करो

                
                                                         
                            डरते नहीं हैं जो
                                                                 
                            
मरते नहीं हैं जो
चलें साथ मेरे
मरें साथ मेरे
हैं शत्रु हमें घेरे
चलो सीमा पर
हो कर तत्पर
लड़ कर
अड़ कर
अक्साई चिन ले लो
बड़ा बलिदान दे दो
एक जीवन दान दे दो
जीने का वक्त बहुत आता है
स्वदेश पर मरने का वक्त आता नहीं
भागने का वक्त बहुत आता है
डटने वक्त सदा आता नहीं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
19 घंटे पहले

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