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गुजारिश

                
                                                         
                            निंद्रा मेरी भयानक रूप
                                                                 
                            
ले लेती है,
गहरे अंधकार में डूब जाने
को कहती है,
मेरी ओर खींचे चले आओ
बस!
इतनी सी गुजारिश
है उसकी
सपनो में डूब जाने की
कोशिश तो
उसकी भी रहती है
मेरा वर्तमान, वह
जानती है
मेरा भाव पहचान लेती है
दुखी होकर तकलीफ
उसे भी होती है
अपनो में खो जाने के
लिए मुझे पुकारती
रहती है।
मैं उसका हर पल इंतजार
करती हूं
निंद्रा आने की
हजारों ख्वाइश करती हुं
अतीत को भूल जाने की
कोशिश करती रहती हूं।
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3 वर्ष पहले

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