आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

भाईचारा

                
                                                         
                            सिखाया पाठ जो, शहादत का हम सबको
                                                                 
                            
कारगिल पर बिखरे लहू को दिखाया सबको,   
पग पग पर फैले फूलों जैसे बारूदों से
कुर्बानी देकर आजाद करवाया हमको ||

 धागे से बंधी, एक डोरी हम देशवासी,
 रंग अनेक, रूप अनेक होते हम वासी,
 काटो तो खून एक हमारा,हर मुश्किल,
 का सामना डट के करते हम देशवासी।।

हिन्दू, मुस्लिम,सीख,ईसाई,
एकजुटता भाईचारे का प्रतीक ये
तोड़े ना कोई इस धागे को
भाईचारा देश की शान है।।

माना, कुछ है कमी हम में, बलात्कारी, भ्रष्टाचारी,
ना जाने कितने रूप छिपे हममें,     
दिन ऐसा आएगा स्वच्छ और आजाद भारत, 
काली परछाई और कॉरोना को मार गिराएगा।।

आयेगा आयेगा एक दिन ऐसा आयेगा
आत्म निर्भर बन कर भारत 
सच्ची भक्ति निभाएगा 
बहे खून कुर्बानी के उनका कर्ज उतारेगा
देर सही भली देर एक दिन फिर
सोनचिरैया कह लाएगा।।

-  अंजू कंवर 
                
जयपुर (राजस्थान)

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर