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बारिश की वो नन्ही बूंदें

                
                                                         
                            बारिश की वो नन्ही नन्ही बूँदें,
                                                                 
                            
मेरे खिड़की पर गिरती हुई,
इठलाती, मचलती,हल्की सी
हवाओं के साथ शोर मचाती हुई,
अपने आप में बेहद खूबसूरत
जो मन के तारों को छेड़कर
कोई मीठी सी गीत गुनगुनाने लगी है।
वो बारिश की नन्ही नन्ही बूँदें
मेरे हाथों को छूकर ,
बचपन की भूली बिसरी यादों को ताजा कर जाती हैं,
इन्हीं नन्ही बूंदों के साथ,
फिर से जिंदगी मुस्कुराने लगी हैं।
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3 वर्ष पहले

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