जब भी आई बात प्यार की संबंधों को तोड़ दिया
इश्क़ हुआ हासिल जब हमको,हमने इश्क को छोड़ दिया
घबराकर, शरमा, झुंझलाकर हमने क्या क्या काम किए
राहें मंजिल को जाती थीं पर कदमों को मोड़ दिया
दूर हुए सबसे हम खुद हीं, तौर तरीके जब देखे
मेरा एक अदद आईना था उसको भी तोड़ दिया
हमको खुद पर नाज था इतना, हम सबको ठुकरा बैठे
दौर ए खिजां ने कतरा कतरा दिल का लहू निचोड़ दिया
हम पहले भी बावस्ता थे तुमसे पर ज्यादा तो नहीं
गौर किया जब नाम से मेरे नाम तुम्हारा जोड़ दिया
आधियों की गुलशन से यूं तो हमने अदावत सुनी भी थी
फूलों लदी हर डाल को लम्हों में ही कैसे झंझोड़ दिया
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