राज कोई भी हो क्यों पर्दा हटाना चाहिए
हर हकीकत क्या जमाने को दिखाना चाहिए?
हर सफर में गर्दिशें भी हैं बहारें हैं अगर
हौसले कम हों तो वापस लौट जाना चाहिए
इश्क ना हो तो,चलो बातें ही हों कुछ इश्क़ की
दिल को बहलाने का भी कोई बहाना चाहिए
डर है उसमें भी न जग जाए कहीं चाहत मेरी
अपनी अच्छाई की हर बातें छिपाना चाहिए
जिसने उससे कही हैं मेरी दयानतदारियां
मैं बहुत मगरूर हूं यह भी बताना चाहिए
आज उजड़ा सा चमन है जो कभी था दिलफरेब
आ बहारें जाएंगी कुछ गुल खिलाना चाहिए
कुछ कशिश तो चाहिए जीने की ख़ातिर जिंदगी
दिल लगाने का भी तो कोई ठिकाना चाहिए
जी रहें हम जिंदगी होकर रवायत के मुरीद
दुश्मनों से महफिलों में दोस्ताना चाहिए
इम्तिहाँ लेती है सबकी,कई दफा यह जिंदगी
कट नहीं सकता है फिर भी सर कटाना चाहिए
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