जश्न की ख्वाहिश नहीं थी
एक फरमाइश नहीं थी
इस दफा भी बह गया सब
ऐसी तो बारिश नहीं थी
वो हमारा हो भी जाता
कोई गुंजाइश नहीं थी
दुनिया हमको भी हो हासिल
खास गुजारिश नहीं थी
मेरा हिस्सा ठीक है,पर
सही पैमाइश नहीं थी
निकल आए,तमाशे से
ऐसी तो नुमाईश नहीं थी
पेश हमको क्या हुआ है
मेरी ये चॉइस नहीं थी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X