दिल का कौन कहा करता है
हर बंदा कुछ कुछ डरता है
जीवन जी लेता है इन्शान
जीता कम ज्यादा मरता है
गैरों की आहें लेता है
फिर खुद भी आहें भरता है
खामोशी से देखता हूं मैं
जब चांद आसमां पर चढ़ता है
मन मेरा पीछा करता है
पास से जब जब तू गुजरा है
तब्दीली क्या ही होती है
सब होता रफ़्ता रफ़्ता है
अब उसकी बातें सुननी हैं
जो कहता, अच्छा कहता है
उससे मिलना भी मुश्किल है
वो अक्सर खोया रहता है
अहमक वो इंसान नहीं पर
भीड़ में भी तन्हा रहता है
जानते हैं सब लोग हकीकत
यह किस्सा बस सुनने का है
ख्वाबों की इस दुनिया का भी
दीवाना हर शख्स रहा है
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