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स्मृतियाँ और दूरियाँ ही

                
                                                         
                            स्मृतियाँ और दूरियाँ ही,
                                                                 
                            
रह जाती हैं प्यार में।
ख़ाक़ में चिंगारियाँ ही
रह जाती हैं प्यार में।।

अनगिनत-सी चाहतों में,
स्वप्न जाते हैं बिखर।
मन को मीठी बात भी,
चुभती है मन देती कुतर
कुछ अधूरी कहानियाँ ही,
रह जाती हैं प्यार में।।

व्योम से तारे न कोई,
तोड़ पाया आज तक।
और जो टूटा न कोई,
जोड़ पाया आज तक।।
सब धरी तैयारियाँ ही
रह जाती हैं प्यार मे।।

दौड़ है साँसों का प्रतिपल
कौन जीता कौन हारा,
मन की हो तो प्रीत वर्ना
कौन किसका है दुलारा?
सिर्फ चलती आरियाँ ही,
रह जाती हैं प्यार में।
-पंडित अनिल
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49 मिनट पहले

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