बिख़र-बिख़र के सँभलने का हौसला रखना
हो वज़्ह कोई किसी से न तुम गिला रखना।
तबाहियों का है मंज़र मगर ख़याल रहे
उठा के हाथ सभी के लिए दुआ रखना।
तमाम उम्र चलेगा न साथ कोई भी
जहाँ तलक हो हक़ीक़त से राब्ता रखना।
यहाँ मिलेगी मुहब्बत नहीं कभी सच्ची
मगर किवाड़ ज़िगर का सदा खुला रखना।
किसी को हद से ज़ियादा न प्यार करना अनिल
क़दम-क़दम पे यहाँ सबसे फासला रखना।
-पंडित अनिल
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