*जीत का ज़श्न*
क़दम से क़दम मिला के चलते रहो।
सर दुश्मनों के कुचलते रहो।।
हौसला कम न हो ऐ!मेरे दोस्तों।
जान की न हो परवाह अरे!दोस्तों।।
हाथ टोली का थामे सँभलते रहो।
सर दुश्मनों के कुचलते रहो
ये जवानी वतन को लगे तो लगे।
दुश्मनों की निशानी न कोई बचे।।
महाकाल बन के निकलते रहो।
सर दुश्मनों के कुचलते रहो
जीत का ज़श्न भारत मनाता रहे।
शौर्य का ताज़ हरदम सजाता रहे।।
घूँट कठिनाईयों के निगलते रहो।
सर दुश्मनों के कुचलते रहो
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