जिन्दगी की मुस्कान हो तुम
दिल की आवाज हो तुम।
आँखों में बसे ख्वाब हो तुम
मंजिल की पहचान हो तुम।
संघर्ष में रोशनी की दीवार हो तुम
गर्मी में पेड़ों की छाँव हो तुम।
ममता की भण्डार हो तुम
पृथ्वी पर देवी की अवतार हो तुम।
इनकी ममता कभी कम नही होती है
कोई साथ दे या ना दे इनकी दुआ साथ देती है।
लफ्जों में बयाँ कैसे करु
इनसे ही लफ्जों की शुरुआत होती है।
आँखों के पलकों पर बिठाये रखती है
गम में भी खुशीओं का एक एहसास रखती है।
नौ महिनें कष्ट को सहकर हर पल पास रखती है
जी लो बची जिंदगी माँ के साथ
माँ ही दुनियाँ की सबसे बड़ी माँ होती है।
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