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ज़िन्दगी कुछ न कुछ देती रही

                
                                                         
                            ज़िन्दगी कुछ न कुछ देती रही
                                                                 
                            
फिर भी सब ओर से शिकायत आई,
किसी के हिस्से में सोना आया,
किसी के हिस्से में चांदी आई ।
उनके हिस्से में जलेबी आई,
मेरे हिस्से में रेबडी आई,
मुफ्त की बांटने वालों को शर्म न आई ।
- आनन्द गुर्जर सहोदर
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एक घंटा पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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