सिंधु के वक्षस्थल पर आज,
भव्य पुल बना धर्मरक्षार्थ,
इधर है सत्य लिए संकल्प,
उधर लंकापति में अति दर्प।
राम का लंका में आगमन,
सिया का प्रमुदित है तन मन
प्रतीक्षा खत्म ,शोक संतप्त ,जटिल दिन दुख के बीतेंगे ।
रघुवर जीतेंगे, जीतेंगे, जीतेंगे
रघुवर जीतेंगे,रघुवर जीतेंगे।
शंभु पर जिसको अति विश्वास,
स्वयं को काल समझता आज,
स्वर्णनगरी में जिसका निलय,
कलुष सब श्रेयस में हो विलय।
वेद वेदांगो का ज्ञानी,
हुआ है जो अति अभिमानी,
हुआ है अंत,सुखी हुए संत देवगण नभ में झूमेंगे।
रघुवर जीतेंगे,जीतेंगे,जीतेंगे।
रघुवर जीतेंगे,रघुवर जीतेंगे।
-अनामिका तिवारी ' अन्नपूर्णा '
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