तुम आए ही क्यों तुम आए ही क्यों
कि मुझमें सब कुछ बदल रहा है
मेरे जज्बातों की परतें पिघलने लगी है
मेरे एहसासों में कुछ सुलग ने लगा है
तुम आए ही क्यों तुम आए ही क्यों
क्यों तुमने मेरी सोई हुई
धड़कनों को है जगा दिया
मेरी रूह को जैसे छू लिया तुमने
बस तुमको ही याद करने लगी मैं
सबको है मैने भुला दिया
तुम आए ही क्यों तुम आए ही क्यों
तुम आए ही क्यों तुम आए क्यों ।।
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