सूरज की तरह खुद जल कर मैने अपनों का जहां रौशन किया
शीतलता और चमक प्रदान की चंद्रमा सितारों की तरह
धरा की तरह जितनी कठोर उतनी कोमल बनी
नदिया की तरह निरंतर बहते हुए मन में सागर से मिलना की चाह लिए गतिशील बनी
जंगलों , सहारा की तरह कठिन डगर पे चलते रही
चट्टानों की तरह मजबूत इरादों से आगे बढ़ी
चींटियों की तरह भटकी नहीं रुकी नहीं , अपने गंतव्य को पाने तक
चिड़ियों की तरह तिनका - तिनका जोड़ कर आसिया बनाया
प्रकृति के कण - कण ने मुझे कुछ अपने जैसा बना दिया ।
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