आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मुझे तुमने फिर से इक अजनबी बना दिया

                
                                                         
                            दो चार बातों ने हलचल मचा दी थी दिल ने मेरे
                                                                 
                            
तूफ़ान सा उठा था सांसों में , धड़कनों को
बढ़ा दिया था मेरी तुम्हारे एहसासों ने
मगर खबर क्या थी कि ये जो जलजला आया है
आकर मुझे तोड़ जाएगा बिखराकर मेरे ख्वाबों को
महफिल में मुझे फिर से तन्हा छोड़ जाएगा
शिकायत गैरो से क्या करूं , कोई अपना ही
मुझे फिर से अजनबी बना के चला जाएगा !!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर