खबर न थी कि कभी हमको भी मुहब्बत होगी
दिल की बगिया पड़ी थी जो सुखी -- सुखी
कभी आबाद भी होगी !!
बंजर दिल का चमन भी कभी महकेगा
खुश रंग हीना का हाथों में सजेगा
मेरे बाबुल आंगन में भी कभी शहनाई बजेगी !!
दुल्हन बन इठलाऊंगी , पीहर के लोगों को
पीछे छोड़ जाऊंगी , सोचा न था कभी
जमीं पर मेरे सपनो की रात सजेगी !!
चांद -- सितारे चमकेंगे मेरे दामन में
गजरा सजेगा बालों में , कजरा लगेगा आंखों में
लगा न देना सखी लाली मुझको , शर्मों हया से ही
लबों की पंखुड़ी सजेगी !!
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