काश लिख पाती
नाम तुम्हारा अपने हाथों की
लकीरों में
जो ये न कर सकी
तो मैने अपना नाम ही
राधा लिख दिया
जैसे श्याम रुक्मणि के पूरे थे
पर राधा बिन अधूरे थे !!
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