सदियों की तपस्या रंग लाई, आज अवध मुस्काती है,
रामलला के पावन मंदिर से, भारत की शान बढ़ाती है।
हर कण-कण गाता "जय श्रीराम", हर हृदय हुआ धन्य,
मर्यादा पुरुषोत्तम के चरणों में, झुकता आज जग अन्य।
कितने युग बीते प्रतीक्षा में, कितने दीप बुझाए थे,
कितनों ने अपने जीवन भर, केवल स्वप्न सजाए थे।
आज वही शुभ घड़ी आई, जब इतिहास मुस्काया है,
रामलला का भव्य मंदिर, भारत का गौरव बन पाया है।
नमन उस दृढ़ संकल्प को, जिसने पथ प्रशस्त बनाया,
जन-जन की वर्षों की आस्था का, स्वर्णिम स्वप्न सजाया।
Narendra Modi के नेतृत्व में वह क्षण आया,
जब रामलला ने अपने धाम में, नव वैभव फिर से पाया।
पर सुन लो हे लोभ के बंदी, धन से जग जीता जाता है?
राम के पावन आँगन में भी, क्या छल कभी छिप पाता है?
सोना लेकर क्या कर लोगे, यदि मन ही रोता जाए?
अंतरात्मा का न्यायाधीश, हर पल तुम्हें बुलाए।
राम धनुष के स्वामी हैं, पर करुणा के सागर भी,
सत्य की राह दिखलाते हैं, धर्म के उज्ज्वल पथिक भी।
जो प्रभु के घर का मान रखे, वही सच्चा इंसान है,
जो लोभ में मर्यादा भूले, उसका जीवन वीरान है।
मंदिर केवल पत्थर नहीं, विश्वासों का दीप महान,
हर ईंट कहे – "सत्य अमर है", हर शिखर बने पहचान।
राम वहीं हैं जहाँ चरित्र हो, सेवा हो, सम्मान रहे,
भारत माँ के हर बेटे में, मर्यादा का ज्ञान रहे।
आओ मिलकर शपथ उठाएँ, राम का आदर्श निभाएँ,
जाति-पंथ के भेद मिटाकर, प्रेम का दीप जलाएँ।
भारत विश्वगुरु बनकर फिर, मानवता का मान करे,
रामराज्य के पावन सपने को, हर जन साकार करे।
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