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वन वन भटके रोए माता।

                
                                                         
                            वन वन भटके रोए माता
                                                                 
                            
माँ बेटे का कैसा नाता।

जाने होगें वे किस हाल में
कोई बता दे रे
कैसे हैं मेरे लाल कहाँ पे
कोई पता दे रे।।
आ रे,आ रे, आ रे।
मेरे राज दुलारे।।

हे तरुवर क्या देखा तूने
मेरे आँख के तारों को
आँखों से दूर हुए हैं
मेरे चाँद सितारों को
हे पुरवाई, हे झील झरने
कोई बता दे रे
कैसे हैं मेरे लाल कहाँ पे
कोई पता दे रे।
आ रे,आ रे, आ रे।
मेरे राज दुलारे।।

ढूंँढते ढूंँढते थक गई आँखे
कोई नज़र न आए
व्याकुल माता की पीड़ा को
कोई समझ न पाए।
हे धरती अम्बर के स्वामी
तू ही बता दे रे
कैसे हैं मेरे लाल कहाँ पे
कोई पता दे रे
कैसे हैं मेरे लाल कहाँ पे
कोई बता दे रे।।

आ रे,आ रे, आ रे।
मेरे राज दुलारे।।
 - अमित प्रेमशंकर
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16 घंटे पहले

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