रिश्ता वही है,
जो शब्दों का मोहताज न हो…
जिसे ख़ामोशियाँ भी समझ लें,
और दूरियाँ भी कम न कर पाएँ।
रिश्ता वही है,
जहाँ साथ होना ज़रूरी नहीं,
बस दिल में होना ही काफ़ी हो…
जहाँ एक की ख़ामोशी,
दूसरे के दिल तक पहुँच जाए।
कुछ रिश्ते नाम से नहीं,
एहसास से पहचाने जाते हैं…
न कोई वादा, न कोई शर्त,
फिर भी उम्रभर निभाए जाते हैं।
जहाँ स्वार्थ नहीं, समर्पण हो…
जहाँ अधिकार नहीं, अपनापन हो…
जहाँ शिकायतें कम,
और समझने की चाहत ज़्यादा हो।
ऐसे रिश्ते किस्मत से नहीं,
रूह की पहचान से मिलते हैं…
और जब मिल जाएँ,
तो उन्हें संभालकर रखना
क्योंकि हर कोई दिल से नहीं,
रूह से जुड़ने वाला नहीं होता।
रिश्ता वही है…
जो वक़्त के साथ बदलता नहीं,
बल्कि हर गुज़रते वक़्त के साथ
और गहरा होता जाता है।
-आचार्य अमित
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