खेतों की इस हरियाली में तिरंगे का है विस्तार,
पानी की मीठी बूंदों में गंगा की है रसधार।
यही है देश का प्यार, यही है देश का प्यार॥
जज्बे-जुनून से वीर जहाँ कभी न मानें हार,
जहाँ पर्वत पहरे देते सीने पर सह के वार।
यही है देश का प्यार, यही है देश का प्यार॥
हर मज़हब-जाति से जुड़े प्रेम का हर एक तार,
जहाँ पुरुष ही आगे नहीं, आगे है हर इक नार।
यही है देश का प्यार, यही है देश का प्यार॥
अतीत उत्तम, भविष्य सर्वोत्तम, वर्तमान के गले में हार,
अग्निपथ के इस विजय पथ पर सपने हुए साकार।
यही है देश का प्यार, यही है देश का प्यार॥
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