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आँखें बंद,करता हूँ तुम्हें करता हु तुम्हे पसंद

                
                                                         
                            आँखें बंद,करता हूँ तुम्हें करता हु तुम्हे पसंद।
                                                                 
                            
भाव की गहराई तुम रस छंदो की मकरंद।

लाल-लाल टमाटर, जमीं से निराला है कंद(आलु)
हौले-हौले दिल में बसों, रगों में बहो मंद-मंद।

हर रंग की कविता हो हर लब्ज तुम्हारा छंद,
खामोशीयो से सुनता हूँ तुम्हारी संवेदनाओं का स्पंद।

सच कहु मिलेंगे मुझ जैसे तुम जैसे लोग बहुत चंद।
बाग-सब्जी कविता तक यह रिश्ता रहा बुलंद।


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9 घंटे पहले

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