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मेरी नायाब शायरी

                
                                                         
                            बाधाओं की आंधियों से कहाँ धैर्य की लौ ढलती है,
                                                                 
                            
संकल्पित इच्छाओ से चाहत की मशाल जलती है

मंजिल की राहों में ही जुनुन कोई पलती है,
भ्रम के भंवर में कोई यकीन की नाव चलती है।

ज्ञान से ग्रेजुएशन किया, प्यार से किया पीजी,
खुद को किया बिजी
फिर मेहनत लगन से हुआ अपना हर लक्ष्य ईजी।

कहीं कोई कमी है, हवाओं में भी नमी है,
बार बार बरसता आसमान, तरसता क्यों जमीं है?

तू नहीं, कोई और सही,
पर तेरे जैसा कोई मिलता नहीं।

सबमें देखु ,गर सब है सही,
मुमकिन है वफ़ा की राह मे भटक जाऊँ कहीं।



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16 घंटे पहले

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