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आज़ादी का तराना: देश के नाम काव्य के पाठकों की रचनाएं

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आज़ादी का तराना - स्लोगन के अंतर्गत जिन पाठकों की कविताएं मिलीं। 

हाशिम रज़ा जलालपुरी 

आज़ादी के फूल खिलाये, भारत के जाँबाज़ों ने
अपने लहू से दीप जलाये, भारत के जाँबाज़ों ने

जब भी उठीं दुश्मन की निगाहें, भारत की सरहद की तरफ
हिम्मत के सूरज चमकाये, भारत के जाँबाज़ों ने

अंग्रेजों के ज़ुल्म मिटा कर, देश को जब आज़ाद किया
शान से तब परचम लहराये, भारत के जाँबाज़ों ने

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, एक बनो और नेक बनो
गीत अहिंसा के भी सुनाये, भारत के जाँबाज़ों ने

जल्लादों के ज़ुल्म के आगे, चूम के फाँसी का तख्ता
नारों से तूफ़ान उठाये, भारत के जाँबाज़ों ने

दुनिया के हर मुल्क से अच्छा, हिंदुस्तान हमारा है
हाशिम यह पैग़ाम सुनाये, भारत के जाँबाज़ों ने 

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एक वर्ष पहले

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