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मेरे अल्फाज़

नीति के दोहे मुक्तक

AL Mishra

89 कविताएं

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जनतंत्र राजहि नेता ,वन राजहि वनराज।
दोनों गरजें राज में ,करते अपना राज।।

अपने को हानि न कोय , मन में करो विचार।
किसी के बहकावे में, मत बनिये हथियार।।

कवि : अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर ,कानपुर।


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