लाल शतक (दोहे)-खण्ड-1

                
                                                             
                            काम हमेशा कीजिये ,जो नाक ऊँची होय।
                                                                     
                            
अपनी भी इज्जत बढ़े ,घर की इज्जत होय।।-[1]

मन संशय नाहीं दूर , कैसे संत कहाय।
काम राग छूटे नहीं ,फिर भी संत कहाय।।-[2]

आँख देखे सारा जग ,खुद नहि देखी जाय।
जो खुद देखै आप को ,वही साधु कहलाय।।-[3]

खाते खाद्य अखाद्य जो ,करते पापाचार।
त्यागहु ऐसे साधु को ,मति करियो सत्कार।।-[4]

संत धरणि पर पग धरहि,धरणि धन्य होइ जाय।
संत चलहि नहि धरणि पर ,नभ में उड़ उड़ जाय।।-[5]


राजनीति

क्रिमिनल से नेता होय ,पावै आदर भाव।
जिमि तांबा मिलि कनक में ,बिकै कनक के भाव।।-[6]

राजनीति में प्रविशि कर ,वाणी रगड़ नहाय।
जीवन का सब मेल धुलि ,उत्तम कीरत पाय।।-[7]

चुनाव आते फूटता ,जातिवाद नासूर।
ध्रुवीकरण हो मतों का, प्रयास हो भरपूर।।-[8]

जन प्रतिनिधि परहेज करें ,जनता से भी भेंट।
जनसेवा से अधिक रुचि , भावैं माला भेंट।।-[9]

दल बदलु का दल बदला , दिल नहिं बदला जाय।
धरिणी गगन मिलत दिखें ,फिर भी क्षितिज कहाय।।-[10]

जनतंत्र राजहि नेता ,वन राजहि वनराज।
दोनों गरजें राज में ,करते अपना काज।।-[11]

क्रिमिनल चुनाव मैदान ,खूब होइ मतदान।
क्रिमिनल पहुँच रहे सदन, सबसे ज्यादा मान।।-[12]

मानवता अब मर चुकी , वोट बैंक की बात।
राष्ट्र हितइ पीछे हुआ ,हो निज हित की बात।।-[13]

अपने को हानि न होय,मन में करो विचार।
किसी के बहकावे में , मत बनिये हथियार।।-[14]


शिक्षक

मुंह में पान मशाला ,ऐसे गुरुवर आज।
आँखों में चश्मा काला ,देते शिक्षा आज।। -[15]

भ्रष्टाचार

काला धन जिन चाहिये , ढूंढें सुरक्षित गेह।
मगर मुंह में पग पकड़ ,गहरे पानी खेह।।-[16]

भ्रष्टाचार रग रग में ,फैला चारो ओर।
कौन विधि ते देश बढ़े ,बढ़े कमीशन खोर।।-[17]

लोक सेवक राजनीति ,गठबंधन जब होय।
भ्रष्टाचार दिन दूना ,यह जानत सब कोय।।-[18]

काले धन से खुल रहे ,राजनीति द्वार।
जनता को गुमराह कर , चाह सदन दरबार।।=[19]

नौकरशाही मीडिया,यदि गठबंधन होय।
समझो भ्रष्टाचार अति ,यह जानत सब कोय।।-[20]

कर्म

भाग्य हि बदले कर्म को ,कर्म बदलता सोच।
अजगर सोचे उदर की ,नाहीं बदले सोच।।-[21]

संकट

प्रबल प्रवाह दरिया का ,ठहरो करो विचार।
संकट काम आवै नाव ,करती दरिया पार।।-[22]

प्रेम

प्रेम हिरदय में जनमे ,नहि चाहे प्रतिदान।
चाहत यदि प्रतिदान की ,उसे वासना जान।।-23]


पीड़ा

जानै पीड़ा न समझे , बनता हो अनजान।
मत कहिये पीड़ा ताहि ,उसका दिल शमशान।।-24]

प्रकृति

धरिणी इक टक देख रही ,कब वारिद दिख जाय।
उमड़ घुमड़ वारिद दिखे ,धरा मगन हुइ जाय।।-[25]

दामिनि दमक मेघ कड़क ,जल से धरा नहाय।
पुलकित हुई धरिणी अब ,मन तृप्त होइ जाय।।-[26]

संतान

संतान की करनी से ,कुल की इज्जत होय।
संतान की करनी से ,वंश कलंकित होय।।-[27]

लोक सेवक

कहने को लोक सेवक ,वह साहब कहलाय।
डिजिटल सुनता नहि कोइ ,फरियादी बुलवाय।। -[28]

विश्वास

अचानक देय भरोसा ,मति करियो विश्वास।
सावधानी तब बरतौ ,बहुतै होइ हि खास।।-[29]

प्रेम

पाती अब इतिहास है ,डिजिटल दर्शन होय।
अब हिय पीड़ा अश्रु बन ,प्रिय के सम्मुख होय।।-[30]

दूती होय या पाती ,हो गइ बीती बात।
डिजिटल युग में अब सुलभ ,हिय उमगे तब बात।।-[31]

सत्य

सत्य सब काल में सत्य , सत्य काटा न जाय।
सत्य कभी डरता नहीं ,भले काल आ जाय।।-[32]

झूला

सावन में झूला नाहि ,न पैग देखी जाय।
अब गीत बने इतिहास ,गीत न गाये जाय।।-[33]

परिवर्तन

बदला बदला हर कोइ ,बदल रही है सोच।
माता पिता अलग रहें ,बेटा की है सोच।।-[34]

नीति हो या अनीति हो , या होय राजनीति।
हर तरफ अपना अपनी , न दिखे नीति अनीति।।-[35]

बदल रही है संस्कृती ,बदल रहा इंसान।
बेटा बेटा अब नहीं ,बेटी बेटा जान।।-[36]

नेता

परिवार का कद ऊँचा ,सोहरत साथ होय।
मीडिया को लेय साथ ,नेता बनता सोय।।-[37]

घर का शत्रु

चुगुलखोर होय घर का ,कबहुँ न रोका जाय।
न करियो विश्वास ताहि ,भले हि तीरथ जाय।।-[38]

मित्र

सम्मुख हो मीठा बोल ,पिछे बिगाड़इ काम।
छोड़ो ऐसे मीत को ,करो अकेले काम।।-39]

मीत सदैव शुभ चिंतक, विपत न छोड़े साथ।
ऐसे मीत मनाइये, दौड़ो लाओ साथ।।-[40]

परिछाईं संकट काल ,धीरज देता होय।
स्वार्थ रहित हो भावना ,मीत जानिये सोय।।-[41]

भले हि हो अच्छा मीत ,कम करियो विश्वास।
मीत होइ यदि नाराज ,खोल भेद उपहास।।-[42]

लक्ष्य

लक्ष्य सदैव ऊँचा होय ,चढ़ जाओ सोपान।
चंदयान दो चढ़ गया ,भारत बना महान।।-43]

जम्मू-कश्मीर का विलय

कश्मीर भारतहि मुकुट ,भारत की है शान।
कश्मीरी अब भारतिय ,भारत की पहिचान।।-44]

दो दिल यदि मिलते दिखें , तीजे ईर्ष्या होय।
भारत कश्मीर इक हुइ , पाकहि पीड़ा होय।।-[45]

समाज सेवा

समाज सेवा अति दुरुह ,सबसे होती नाहि।
समाज सेवा जो करे ,जन में आदर पाहि।।-[46]
मीडिया

जनतंत्रहि चतुर्थ स्तम्भ ,मीडिया हि कहलाय।
निष्पक्ष संवाददाता ,सबसे आदर पाय।।-[47]

रिपोर्टिंग महा दुष्कर ,सबके बस की नाहि।
जनहित जिसका लक्ष्य नहि ,कभी रिपोर्टर नाहि।।=[48]

मीडिया खड़े पुकारे ,चाहे लेव खरीद।
धनवानों के दास हम ,नेता हुए मुरीद।। -[49]

व्यवसाय

उत्तम राजनीति कहो ,मध्यम धंधा होय।
निम्न चाकरी जानिये ,अधम किसानी होय।।-[50]
शेष खंड-2 पर

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9 months ago

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