तुम आज छुपा लो ख़ता किसी की, सत्ता के ऊँचे साए में,
पर कल जवाब देना होगा इस देश की खुली हवाओं में।
तुम लाख दबाओ आवाज़ों को, सच फिर भी सामने आएगा,
इस देश का जागता युवा अब हर अन्याय से टकराएगा।
इतिहास गवाह है, जब-जब युवा शक्ति अंगड़ाई लेती है,
सिंहासन डोलने लगता है और हुकूमत दम दबाती है।
यह आज की हुंकार नहीं, यह कल का नया सवेरा है,
तुम कितनों को ख़ामोश करोगे, यहाँ हर युवा अब शेर है।
जब तक न्याय का सूरज इस धरती पर उदित नहीं होगा,
यह थकेगा नहीं, यह रुकेगा नहीं, यह इंकलाब जारी रहेगा!
-आदित्य देवीलाल यादव
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