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एहसासो के हस्ताक्षर

                
                                                         
                            जो तुम्हारा है ही नहीं उसे दे दिया।
                                                                 
                            
भिखारी भीख में ही भीख दे दिया।।

दिल दिवारो से चाहता क्या है।
जो बोलते नहीं उनसे बातें क्या हैं।

हस्ताक्षर दिल पर बिना हाथों के किया उसने।
पेन स्याही का पैसा बचा लिया उसने।।

रहा एहसास में मेरे उसका क्या नाम लूं।
मुझे मालूम नहीं उसे क्या नाम दूं।।

पर कटे परिंदे प्यार से उड़ने लगे।
टूटे हुए दिल भी अब जुड़ने लगे।।

रह गई अधूरी बात क्या,
अजय सो गई खाट क्या?
रातों में चमगादड़ों का गायन,
भूतों की दिख गई बारात क्या?
-आदित्य दाहिया
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4 घंटे पहले

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