झूठे वादे करके देखो,
हमको जातिवाद में बाँध दिया।
धर्म के नाम पर लूटा हमको,
हिंदू-मुस्लिम का नाम दिया।
न जाने कितनी ही बार,
देश के खजाने लूटे हैं।
जब बात आई हक मिलने की,
तब सारे रिश्ते टूटे हैं।
दुनिया को दिखाने के लिए,
नेता जी ढोंग रचाते हैं।
पर भीतर ही भीतर देखो,
जनता को लूट खाते हैं।
जनता आज हैरान-परेशान,
हिसाब-किताब का नाम नहीं।
अब नेता बनने की रेस में,
कोई भी साधारण आम नहीं।
बिजनेसमैन भी आ रहे यहाँ,
और फिल्म जगत के सितारे भी।
देश को बर्बादी पर छोड़,
ये भर रहे पेट अपने सारे ही।
नेता जी सफ़ेद कुर्ता पहनकर,
झूठ पर झूठ बोलते हैं।
आम इंसान के सीधे मन को,
भीतर से खोखला करते हैं।
जनता का हित भूलकर ये,
बस अपनी जेबें भरते हैं।
देश के सच्चे नागरिकों को,
ये पूरी तरह छद्म करते हैं।
झूठे वादे करके देखो,
हमको जातिवाद में बाँध दिया।
धर्म के नाम पर लूटा हमको,
हिंदू-मुस्लिम का नाम दिया।
न जाने कितनी ही बार,
देश के खजाने लूटे हैं।
नेता जी कहना भी अब तो,
इन लोगों को ठीक नहीं।
साहब! ये नेता लूट रहे हमको,
देश की बची अब साख नहीं।
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