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कोई हमें क्यों याद करे

                
                                                         
                            कोई हमें ,
                                                                 
                            
हमें क्यों याद करे,
शायद ,
कभी नहीं हम ही पागल बने रहे ,
उनसे मिलने को वो क्या सोचते हैं ?
हमारे बारे में ,
शायद देखो,
हम तो पागल दिल हैं,
क्या करें मालूम नहीं।
उसे मिलने को दिल तो सुकून है,
वो लगता है ,
बिना किताब के पन्नों में ,
नहीं पढ़ता था।
शायद ,
कितने उपन्यास।
उपन्यास के भेद,
कहानी याद की बातें!
जब वो मिलते हैं ,
हमसे तो लगता है ,
सब काम हो गए।
उन्हें मालूम हो ,
कोई खामोश बातें,
हर पैगाम पर यह,
इश्क़ का ख्याल है!
अपने ही प्यार के हैं...
हमें याद कोई क्यों करे,
हमारे बारे में ,
कौन ही बातें करे,
बीते पल-बीते ख्याल ,
को ज़ख्म की ,
तरह हम क्यों न भूल जाएँ!
कोई तोकभी तो,
छोटी बातें ही गुड क्या सोचना...
पता नहीं !
हमें कोई,
कोई हमें याद क्यों करे,
शायद,
कभी नहीं ?
गरजते बादल से भी पूछता हूँ,
हमें ,
कोई याद ,
क्यों ?
करेगा,
मुस्कान की तेज़ धार देते हुए ,
वो,
निकल जाते हैं कहीं,
हम जब भी मिलने की ,
कोशिश करते हैं,
तो वो ,
कुछ कह कर टाल देते हैं,
शायद कभी,
देखेंगे लगता है।
कोई नहीं मेरे लिए,
कभी कभी-कभी
और भी ?
हमें क्यों ?
कोई याद करेगा,
शायद,
क्यों ?
परन्तु ,
परंतु की परिभाषा दे कोई...
-अभिषेक गुप्ता
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36 मिनट पहले

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