मौसम भी कितना अजीब होता है,
कभी धूप बनकर मुस्कुराता है,
कभी बादलों की ओट में छुपकर,
आँखों से चुपके बरस जाता है।
ठंडी हवा जब छूती है चेहरे को,
कुछ पुराने एहसास जगा देती है,
जो बातें कह न सके कभी हम,
वो खामोशी में कह जाती है।
बारिश की हर एक बूंद जैसे,
दिल पर कोई गीत लिखती है,
सूनी राहों पर भी जाने क्यों,
किसी के आने की आस दिखती है।
फिर मौसम बदल जाता है,
पेड़ों से पत्ते झर जाते हैं,
कुछ रिश्ते पास रहकर भी,
धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं।
शायद मौसम हमें यही सिखाता है—
कुछ भी हमेशा नहीं रहता,
दर्द हो या खुशी, धूप हो या बारिश,
हर मौसम एक दिन गुजर जाता है।
और फिर किसी अनजान सुबह,
हवा में फिर खुशबू आती है,
टूटा हुआ दिल भी चुपके से
जीने की वजह पा जाता है।
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