तुम पूछती हो मेरा दिल तुम्हारे प्यार में पागल क्यूॅं है?
ये झील-सी गहरी ऑंखें ज़ुल्फ़ों में बादल क्यूॅं है??
तुम्हारे गिर्द-ओ-पेश जान-ए-बहार बहारों की गलियाॅं क्यूॅं हैं?
तुम्हारी हॅंसी में फूल मुस्कुराहट में कलियाॅं क्यूॅं हैं??
तुम्हारे होंटों में शहद गालों में गुलाब क्यूॅं है?
तुम्हारी जवानी बे-मिसाल तुम्हारा हुस्न लाजवाब क्यूॅं है??
ये मरमरी तुम्हारी बाहें फूलों-से नाज़ुक पाॅंव क्यूॅं हैं?
ख़ुशबू उड़ाती लहराती ज़ुल्फ़ों की घनेरी छाॅंव क्यूॅं है??
कजरारी तेरी पलकों का सुरमई ऑंचल क्यूॅं है?
होश उड़ाती ऑंखों में जादू जगाता काजल क्यूॅं है??
दिल को जकड़े नर्म मुलायम रेशम जैसे बाल क्यूॅं हैं?
इठलाती बलखाती तेरी हिरनी जैसी चाल क्यूॅं है??
तुम्हारी साॅंसों में ख़ुशबू धड़कनों में साज़ क्यूॅं है?
हर अदा दिलरुबा दिलनशीं अंदाज़ क्यूॅं है??
इन्कार के परदे में छुपा हुआ इक़रार क्यूॅं है?
न होते हुए भी तुम्हें हम से प्यार क्यूॅं है??
चेहरे पे गिरी लटों को जो न इस तरह झटकते!
हम जैसे मुसाफ़िर 'परवेज़' अपनी मंज़िल से न भटकते!!
- आलम-ए-ग़ज़ल परवेज़ अहमद
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