आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

स्त्री शक्ति

                
                                                         
                            कोई कहता है वाचाल हो तुम ,
                                                                 
                            
कोई मूक हो कह कर चला गया

किसी ने धीमे स्वर की बात न सुनी
किसी ने ऊंचे स्वर का विरोध किया
कोई बोला कि तुम तो नारी हो
तुमको समाज का बोध नहीं
तुम सबल हो गृह अधिकारी हो
तुम्हे शोभा देता क्रोध नहीं

बाहर की दुनिया अंगार सी है
तुम कोमल सी फूल हो जल जाओगी
घर में सुंदर श्रृंगार करो
बाहर क्या ही कर पाओगी

आओ हम तुम्हे बताते हैं
हम क्या करने में सक्षम हैं,
अतीत से लेके वर्तमान तक
हमने लहराए कितने परचम हैं।

जिनके गर्भ से सृष्टि जन्मी वो
माता आदि परा शक्ति नारी
हर जीव जो जग में जीवित है
उनकी शक्ति ही है सारी

सतयुग में माता गंगा ने
इच्छवाकु वंश उद्धार किया
उनकी पवित्रता की गाथा को
वेदों ने भी स्वीकार किया

पिता के अभिमान को भंग करने
मां सती यज्ञ में सती हुई
की पति के अधिकारों की रक्षा
तब ठीक दक्ष की मति हुई

माता अनसुइया ना याद तुम्हे
त्रिदेवों को बालक बनाया था
नारी शक्ति,तप, ध्यान का बल
होता है क्या समझाया था ।

अब चलो जरा त्रेता युग में
सीता मां का स्वाभिमान याद दिलाते है
तिनके के ओट की ताकत को
क्यों लोग समझ न पाते हैं।

श्री राम के प्रारब्ध की पूर्ति में
मां कैकेई ने कलंक लिया सर पर
मंदोदरी की बात नहीं मानी
रावण था मृत्यु को तत्पर

माता अहिल्या की भी कथा
रामायण में विस्तारित है
पवित्रता की वो प्रतिमा थीं
जो राम चरणों से उद्धारित हैं

तुम्हे चलो घुमा दे द्वापर युग में
जहां नारी शक्ति की झांकी है
द्रौपदी के स्वाभिमान हरण की
गाथा महाभारत गाती है

उसी युग की महालक्ष्मी
राधा रानी को कैसे भूल गए
मात्र जिन्होंने प्रेम शक्ति पर
सारे बंधन अनुकूल किए

हम कहते है कथा गांधारी की
जो माता बड़ी अभागी थी
धृतराष्ट्र पति थे नेत्रहीन तो उन्होंने
अपनी दृष्टि भी त्यागी थी

यदि कलयुग की हम बात करें
तो लक्ष्मीबाई को कौन भुला सकता
उनकी शक्ति का अनुमान तो
केवल डलहौजी लगा सकता

पद्मावती पतिव्रत थी
जीवन से ऊपर चरित्र चुना
हाड़ी रानी ने मस्तक देकर
पति को मोह से अपने मुक्त किया

रानी कर्णावती ने पुत्र अधिकार हेतु
अंग्रेजो से कितने युद्ध किए
वो लड़ते लड़ते शहीद हुई
जब अपने ही उनके विरुद्ध हुए

ऐसी नारियां हमारी प्रेरणा है
और तुम अबला हमको कहते हो
मंदिर में पूजा करते हो
और घर पर गला पकड़ते हो।

जिस पल विश्व की हर नारी
जागृत स्थिति में आयेगी
तुम स्पर्श करोगे छाया को
वो गर्दन पर अस्त्र चलाएगी

जो जगत की मां जगजननी है
क्या उसके प्रकोप का भान तुम्हे
जो जन्म देने में सक्षम है
जीवन हरने का भी है ज्ञान उसे

जागो जागो अब जाग जाओ
स्त्रेण शक्ति है वो सम्मान करो
करने को संघार मजबूर हो जाए वो
ऐसे काल का न आह्वान करो

आज की नारियों को भी कहती हूं मैं
तुम सबल , सशक्त और सक्षम हो
अपनी गरिमा को समझो तुम
दुर्गा देवी की वंशज हो ।

हर उस भय का संघार करो
जो निर्बल तुम्हे बनाता है
हर उस मानसिकता को दूर करो
जिसमे अबला तुम्हे कहा जाता है।

अपने सम्मान की प्राप्ति हेतु
तुम्हे स्वयं युद्ध करना होगा
आगे आने में देर है बस
फिर सारा सच सपना होगा

स्त्रैण शक्ति का भरमार रूप
हो अपार असीमित परा शक्ति
आराध्या हो तुम देवों की
तुममें ही है सम्पूर्ण प्रकृति

है मां पर भी विश्वास मुझे
वो कलयुग में भी आएंगी
जागृत होंगी हर स्त्री में
हर असुर के भय को मिटाएंगी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर