‘सौ साल का युवा संघ’
भारत को अब डर नहीं है,
किसी बात की फ़िक्र नहीं है,
स्वयंसेवक सावधान हो गया,
संघ हो गया सौ साल का, बूढ़ा नहीं जवान हो गया।
संघ हो गया सौ साल का, बूढ़ा नहीं जवान हो गया।।
समरसता का भाव जगाना,
भेदभाव का घाव मिटाना,
घर-घर में स्वदेशी लाकर,
कर्तव्यों का भान हो गया,
संघ हो गया सौ साल का, बूढ़ा नहीं जवान हो गया।
संघ हो गया सौ साल का, बूढ़ा नहीं जवान हो गया।।
पर्यावरण सुरक्षित करना,
शुभ संस्कारों का रस भरना,
पंच-परिवर्तन जन-जन तक,
पहुँचाना अभियान हो गया,
संघ हो गया सौ साल का, बूढ़ा नहीं जवान हो गया।
संघ हो गया सौ साल का, बूढ़ा नहीं जवान हो गया।।
शिक्षा का आलोक जगाना,
सच्ची सेवा-राह बनाना,
मातृभूमि की रक्षा करना,
सच्चा अब ईमान हो गया,
संघ हो गया सौ साल का, बूढ़ा नहीं जवान हो गया।
संघ हो गया सौ साल का, बूढ़ा नहीं जवान हो गया।।
राम राज्य धरती पर लाना,
सोने की चिड़िया फिर बनाना,
विश्वगुरु भारत को करना,
जन-जन का अरमान हो गया,
संघ हो गया सौ साल का, बूढ़ा नहीं जवान हो गया।
संघ हो गया सौ साल का, बूढ़ा नहीं जवान हो गया।।
जब तक लक्ष्य सिद्ध ना होगा,
संघ कभी भी वृद्ध ना होगा,
परम वैभव तक कदम बढ़ेंगे,
अमर विजय का गान हो गया,
संघ हो गया सौ साल का, बूढ़ा नहीं जवान हो गया।
संघ हो गया सौ साल का, बूढ़ा नहीं जवान हो गया।।
- प्रवेश कुमार धानका
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