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वो बारिश और वो किस्सा पुराना

                
                                                         
                            मुझे आज भी याद है वो बारिश,
                                                                 
                            
और वो गाना पुराना...
और मेरे pose का lyrics से
match न होने पर,
तुम्हारा मुझे यूँ मज़ाक-मज़ाक में सुनाना...

यार, मज़ाक तो बस एक बहाना था,
असल में तो मुझे
तुम्हें अपना हाल-ए-दिल सुनाना था...

हाय... ऊपर से उस मौसम की कुछ गुस्ताख़ियाँ,
और दूसरी तरफ़ तुम्हारा यूँ इतराना...
बहुत याद आता है मुझे
आज भी वो किस्सा पुराना...

आज भी जब देखती हूँ
बारिश को यूँ आते हुए,
लगता है जैसे ये बादल
मुझे ही बुलाते हैं...

तुम्हारी तरह,
जैसे धीरे से कहते हों—

“चली आना...
चली आना...”

 
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40 मिनट पहले

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