देख करके काल को
किलकारिया होने लगी
पास खड़े उस सांप को
चिड़िया जो रोने लगी
घोसलो में थे कुछ बच्चे
जिनके पर नहीं निकले थे
उस बार भी इनके अंडोको
इस सांप ने ही निगले थे
चूँ चूँ चूँ की आवाज कर के
अब तो खूब होने लगी
देख करके उस काल को
किल कारिया होने लगी
पास खड़े उस सांप को
चिड़िया जो रोने लगी
असहाय हो करके खूब
यूँ रट लगा रही थी
आँखों से आंसुओ की
खूब धारा बहा रही थी
सांप को ले मोर उड़ गया
तब तसल्ली होने लगी
देख करके काल को
किलकारिया होने लगी
पास खड़े उस सांप को
चिड़िया जो रोने लगी
शम्भू नाथ कैलाशी
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