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Uday Pratap Singh: माली तुम्हीं फैसला कर दो, हम किसको दोषी ठहराएँ ?

उर्दू अदब
                
                                                                                 
                            अगर बहारें पतझड़ जैसा रूप बना उपवन में आएँ
                                                                                                

माली तुम्हीं फैसला कर दो, हम किसको दोषी ठहराएँ ?

वातावरण आज उपवन का अजब घुटन से भरा हुआ है
कलियाँ हैं भयभीत फूल से, फूल शूल से डरा हुआ है
सोचो तो तुम, क्या कारण है दिल दिल के नज़दीक नहीं है
जीवन की सुविधाओं का बँटवारा शायद ठीक नहीं है

उपवन में यदि बिना खिले ही कलियाँ मुरझाने लग जाएँ
माली तुम्हीं फैसला कर दो, हम किसको दोषी ठहराएँ ?

यह अपनी-अपनी किस्मत है कुछ कलियाँ खिलती हैं ऊपर
और दूसरी मुरझा जातीं झुके-झुके जीवन भर भू पर
माना बदकिस्मत हैं लेकिन, क्या वे महक नहीं सकती हैं
अगर मिले अवसर अंगारे सी क्या दहक नहीं सकती हैं ?

धूप रोशनी अगर चमन में ऊपर ऊपर ही बँट जाएँ
माली तुम्हीं फैसला कर दो, हम किसको दोषी ठहराएँ ? आगे पढ़ें

5 months ago

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