आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

राकेश धर द्विवेदी: आप हमसे जो नज़रे मिलाने लगे

कविता
                
                                                         
                            आप हमसे जो नज़रे मिलाने लगे
                                                                 
                            
फूल डाली पर लगे मुस्कराने लगे

फूल पर बैठे भौंरे ने मुझसे कहा
देखो बगिया में कोयल गुनगुनाने लगे

रात भर किसी की याद में चाँद रोया बहुत
ओस की बूँद ये कहानी सुनाने लगे

यूँ तो रुखसत हुए आपसे अरसा हुआ 
लेकिन आपको भूलने में जमाने लगे

जब पलटे किताबों के पन्ने पुराने
तो उसमें कुछ ख़त पुराने मिले

उनके हर्फों को हमने जब फिर से पढ़ा
मेरे अश्क़ नयनों से बहकर के आने लगे।

एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर