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Hindi Poetry: निर्मला पुतुल की कविता- क्या तुम जानते हो पुरुष से भिन्न एक स्त्री का एकांत?

कविता
                
                                                         
                            क्या तुम जानते हो 
                                                                 
                            
पुरुष से भिन्न 
एक स्त्री का एकांत? 

घर, प्रेम और जाति से अलग 
एक स्त्री को उसकी अपनी ज़मीन 
के बारे में बता सकते हो तुम? 

बता सकते हो 
सदियों से अपना घर तलाशती 
एक बेचैन स्त्री को 
उसके घर का पता? 

क्या तुम जानते हो 
अपनी कल्पना में 
किस तरह एक ही समय में 
स्वयं को स्थापित और निर्वासित 
करती है एक स्त्री? 

सपनों में भागती 
एक स्त्री का पीछा करते 
कभी देखा है तुमने उसे 
रिश्तों के कुरुक्षेत्र में 
अपने आपसे तड़ते?  आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

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