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Hindi Poetry: मनोहर श्याम जोशी की तीन चुनिंदा कविताएं

कविता
                
                                                         
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आग हवा का उत्तर लपटों से देती है
शब्दों से नहीं।
प्रेमिका प्यार का उत्तर चुंबनों से देती है
शब्दों से नहीं।
चुनौती का उत्तर मनौती नहीं कर्म है।
चुनौती का उत्तर कर्म से देना ही हमारा धर्म है।

2- 

नयनों में जमे हुए भावना के सागर।
पनिहारिन परेशान, आफ़त में हुई जान,
पनघट पर बैठी हुई, फूटी हुई गागर।
कैसे भरे पानी? कहाँ से भरे पानी?
गागर दो! गागर दो! पिघला दो सागर को!
भरने दो पानी, प्रभु, भरने दो पानी!

3- 
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एक महीने पहले

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