आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कुमार मुकुल की कविता- ज्ञानी हो नहीं सकता मूर्ख

कविता
                
                                                         
                            चरवाहे बन सकते हैं शहंशाह 
                                                                 
                            
शहंशाह बन नहीं सकता चरवाहा चाहकर भी 
तानाशाह बन सकता है वह 

भोला-भाला व्यक्ति 
बन सकता है पंडित ज्ञानी विराट 
ज्ञानी हो नहीं सकता मूर्ख 
पागल हो सकता है वह 

आकाश छूती ज़मीन को 
पाट सकते हो अट्टालिकाओं से 
खींच सकते हो 
कई-कई और चीन की दीवार 
उसे बदल नहीं सकते समतल भूमि में 
खँडहर बना सकते हो 
वहाँ बोलेंगे उल्लू। 
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर