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Hindi Poetry: कुमार अंबुज की कविता- एक स्त्री पर कीजिए विश्वास

कविता
                
                                                         
                            जब ढह रही हों आस्थाएं
                                                                 
                            
जब भटक रहे हों रास्ता
तो इस संसार में एक स्त्री पर कीजिए विश्वास

वह बताएगी सबसे छिपाकर रखा गया अनुभव
अपने अँधेरों में से निकालकर देगी वही एक कंदील
कितने निर्वासित, कितने शरणार्थी,
कितने टूटे हुए दुखों से, कितने गर्वीले
कितने पक्षी, कितने शिकारी
सब करते रहे हैं एक स्त्री की गोद पर भरोसा
जो पराजित हुए उन्हें एक स्त्री के स्पर्श ने ही बना दिया विजेता आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

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