गुनगुनी धूप में
धुआँ-धुआँ-सी
घूम रही है
मुखरित-सी पुरवाई
... नववर्ष के द्वारे देखो
मनभावन-सी
सर्दी आई
अलाव की लहरों पर
पिघलती कोहरे की परछाई
तितली-तितली मौसम पर
गीत सुनाती
शरद ऋतु की शहनाई
नववर्ष के द्वारे देखो
मनभावन-सी सर्दी आई
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